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बंगला नम्बर 2017

जिस शहर में हर छोटे से छोटे बंगले की कीमत करोड़ों में है, वहां "बंगला नंबर 17" भी है, जिसे कोई, फ्री में भी खरीदना पसंद नहीं करता है, क्योंकि "बंगला नंबर 217" का नाम सुनते ही, लोगों के कान खड़े हो जाते हैं, उनके दिल की धड़कन तेज हो जाती है, आखिर क्या वजह है"? "जो "बंगला नंबर 217" का नाम सुनते ही लोग डर जाते हैं, जानने के लिए चलते हैं, "बंगला नंबर 217"!

पर इससे पहले, आप इस कहानी के हीरो से मिल लिजीए, इनका नाम राम शर्मा है, यह एक आर्किटेक्ट इंजीनियर है, इनके नाम और इनके रहन-सहन से आप, यह बात तो बहुत अच्छे से समझ गए होंगे कि यह बहुत ही धार्मिक किस्म के इंसान हैं, पर मैं बता दूं, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है, इन्होंने जो मस्तक पर तिलक लगा रहा है, हाथों में धागे पहन रखे हैं और गले में मालाए लटका रखी है, यह अपनी पत्नी की खुशी के लिए किया है, क्योंकि यह अपनी पत्नी से बहुत प्रेम करते हैं पर भगवान, भूत, चुड़ैल, आत्मा जैसी शक्तियों पर इनको जरा सा भी विश्वास नहीं है, भगवान, देवी देवता, बाबा, तांत्रिक, जानकार, ज्योतिषियों के यह कट्टर दुश्मन है, आप खुद ही देख लीजिए

इस वक्त राम, अपने मैनेजर के साथ बाइक से मकान देखने जा रहा हैं, तभी मैनेजर, एक मंदिर के सामने बाइक रोकता है

"यहां बाइक क्यों रोकी है"? राम ने पूछा

"सर"! "भाभी ने कहा था, मकान देखने से पहले, मंदिर चले जाना, अगरबत्ती फुल प्रसाद चढ़ाना"! मैनेजर ने बताया

"अरे,,,,तेरी भाभी तो पागल है, तु उसका मैनेजर है या मेरा मैनेजर है, तनख्वाह मुझसे लेता है और काम उसका करता है, कुछ नहीं होता, अगरबत्ती, फुल प्रसाद चढ़ाने से, चल"! राम ने कहा

"भाभी को पता चल गया, तो जान ले लेगी हमारी और भगवान के काम में झूठ बोलना बुरी बात है, अगर मुझसे पूछा तो सब सच बता दूंगा"! मैनेजर ने कहा

"अगले महीने से किसी समझदार मैनेजर को रखना पड़ेगा नहीं तो यह मेरा पूरा मैनेजमेंट बिगाड़ देगा"! राम ने मन मे कहां

"अगले महीने की, अगले महीने सोचना"! मैनेजर ने कहा

"तूने, कैसे सुन लिया"? राम ने आश्चर्य से पूछा

"मन में इतनी जोर-जोर से बोलोगे तो सुनाई तो देगा ना, सर"! मैनेजर ने बताया

फिर वह दोनों, फुलप्रसाद वाले की दुकान पर आते हैं

"यह फूल प्रसाद की टोकरी, कितने की है"? राम ने पूछा

"₹100 की है, भैया"! फुलप्रसाद वाले ने कहा

"एं,,,₹10 का सामान, ₹100 में बेच रहे हो, इतने तो टमाटर के भाव भी नहीं है बड़े हैं, ₹50 में देना हो तो दो, नहीं तो दूसरी दुकान से ले लूंगा"! राम ने कहा

"सभी दुकान पर एक ही भाव है ओर ये फुल, मेरे बाप के बगीचे से तोड़कर नहीं लाया हूं, मुंह मांगे रेट में खरीद कर लाया हूं, वैसे आप क्या करते हो, भैया"? फुलप्रसाद वाले ने पूछा

"आर्किटेक्ट इंजीनियर हूं"! राम ने बताया

"मेरे घर का नक्शा बनाना है, ₹20 में बना दोगे"! फुलप्रसाद वाले ने पूछा

"हां,,,,,,,,"बना दूंगा पर ₹20 नहीं, ₹20000 लगेंगे"! राम ने कहा

"जब तुम ₹20 के काम के, 20000 ले सकते हो, तो मैं ₹10 के समान के, ₹100 क्यों नहीं ले सकता, असली लूटमार तो तुम जैसे पढ़े लिखे, लोगों ने ही मचा रखी है, देश में"! "इसीलिए हम गरीबों का कभी, भला नहीं होता, लेना हो तो लो, नहीं तो हाथ जोड़ो और निकलो"! फूल प्रसाद वाले ने कहा

"अरे सर, क्या भगवान के नाम पर किच-किच कर रहे हो, दो बेचारे गरीब को ₹100"! मैनेजर ने कहा

फिर वह दोनों मंदिर में आते हैं

राम, भगवान को फूल चढ़ाता है, प्रसाद चढ़ाता है, अगरबत्ती लगाता है

तभी पंडित राम से कहता है -"सच्चे मन से भगवान को ₹100 अर्पण कर दो, तुम्हारे सभी मंगलकार्य सिद्ध होंगे"!

"पंडित जी"! "पर्स घर भुल आया हूं, इस बार क्षमा कीजिए"! राम ने हाथ जोड़ते हुए कहा

"कोई बात नहीं, वह दान पेटी पर क्यूआर कोड है, पेटीएम, फोन पै, गूगल पै, सारी सुविधा है, वहाँ कर दिजिए"! पंडित ने दान पेटी तरफ, इशारा करते हुए कहा

"पंडित जी, आज जल्दबाजी में मोबाइल भी घर भूल आया"!

तभी राम के फोन की रिंगटोन बजती है, राम फोन उठाता है, "आपके फोन की वैद्यता, जल्द समाप्त होने वाली है"! फिर राम फोन काटता है तो पंडित कहता है "तुम्हारे शुभ कार्यों की वैधता, भी जल्द समाप्त होने वाली है, तुम्हारे  सिर पर मंगल की माया, शनि का साया है, इसीलिए तुम्हें, दान दक्षिणा देने में कष्ट हो रहा है, जल्द से जल्द, शनि, मंगल के जाप करा लो, नहीं तो बहुत भयंकर, संकट में फस जाओगे"! पंडित ने कहा

"पंडित जी"! "पिछले महीने तो जाप कराये थे, शनि, मंगल के और आपने कहा था, सब ठीक हो जाएगा, आप गारंटी से काम नहीं करते हो"! राम ने कहा

पिछले महीने ,राहु और केतु के जाप कराए थे, तुम्हारी पत्नी को भेजना, उन्हें जल्द, इस संकट के बारे में बताना होगा, नहीं तो अनर्थ हो सकता है"! पंडित ने गंभीर भाव से कहा

"यह पंडित, मेरी धार्मिक पत्नी को डरा कर, पैसे एठना चाहता है"! राम ने मन में कहा

"जैसा तुम सोच रहे हो, वैसा नहीं है, "बेटा"! पंडित ने कहा

"आपने भी सुन लिया"! राम मैं आश्चर्य से पूछा

"मैंने सब कुछ सुन लिया और सब कुछ समझ भी लिया है, तुमने किसी अशुभ, वस्तु को छुआ है, इसीलिए वह बुरी शक्ति तुम्हारे पीछे लग गई है, तुम, अपनी पत्नी को लेकर कल मेरे पास आओ"!

"ठीक है, पंडित जी, मैं जरूर आऊंगा"!

फिर राम अपने मैनेजर के साथ, न्यू अपार्टमेंट में आता है, वहां उन्हें शंकर नाम का दलाल कई फ्लैट दिखाता है, सभी फ्लैट देखने के बाद राम पूछता है -"आपने, जितने भी फ्लैट दिखाएं, मुझे सभी अच्छे लगे, अगर केश में लेंगे तो कितने का पड़ेगा"!

दलाल कैलकुलेट करके बताता है "अगर यह फ्लैट, आप केश में लोगे, तो आपको 30 लाख रुपए में पड़ेगा"!

"देखो, शंकर भैया, मैं स्पष्ट बातें करता हूं, मुझे 25 लाख में इसी साइज में फ्लैट चाहिए, अगर हो तो बताना, अब चलता हूं"!

राम अपने मैनेजर के साथ वहां से जाने लगता है, तभी दलाल के पास फोन आता है -"कैसे हो शंकर भाई"? "रोज, न्यू अपार्टमेंट, में फ्लैट बिकवा रहे हो, मेरे "बंग्ला नंबर 217" का भी सौदा करा दो"!

"मणि भाई, तुम्हारे "बंग्ला नंबर 217" को कोई, फ्री में भी खरीदना नहीं चाहता है, जितने भी कस्टमर को दिखाया, सभी कुछ ना कुछ बहाना करके भाग गए, कोई कहता है वहां भूत है, कोई कहता है चुड़ैल है, कोई कहता है बुरी आत्मा का साया है, कोई भी फैमिली वहां एक दिन से ज्यादा नहीं टिक पाई"! शंकर दलाल ने कहा

"अरे शंकर भाई, तुम्हारे लिए कौन सा बड़ा काम है, कुछ भी करके, मुझे बस 25 लाख रुपए दिलवा दो, एक करोड़ का बंगला है, तुम्हें कमीशन भी तगड़ा दूंगा, बस कुछ भी करके मेरा बंग्ला बिकवा दो"! बंग्ला मालीक मणि ने कहा

"ठीक है, मैं कुछ करता हूं"! यह कहकर शंकर दलाल फोन काटता है

और राम को आवाज देकर बुलाता है -"शर्मा जी"! "इधर आइए"!

राम अपने मैनेजर के साथ वापस आता है, तो वह दलाल उन्हें बिठाकर कहता है -"शर्मा जी, आप घर जैसे व्यक्ति हो, इसलिए इस अपार्टमेंट में आपको 30 लाख रुपए में फ्लैट तो नहीं मिल पाएगा, पर हां, आपको 30 लाख रुपए में, यही से आधा किलोमीटर दूर, एक बंगला मिल सकता है पर एक दिक्कत है"!

"क्या"? "पानी नहीं आता"! मैनेजर ने पूछा

"नहीं, पानी, बिजली सारी व्यवस्था है पर किसी ने अफवाह फैला रखी है कि वहां आत्मा का साया है"! दलाल ने बताया

"अरे, मेरे सर, भगवान से नहीं डरते तो भूत, चुड़ैल, आत्मा से क्या डरेंगे, आप बंगला दिखाओ"!

फिर वह तीनों "बांग्ला नंबर 217" पर आते हैं, दलाल जब बंगले का ताला खोलता है तो न जाने कैसे उसकी उंगली पर चोट लग जाती है और चाबी और ताले पर खून लग जाता है

यह देखकर मैनेजर कहता है -"ताला खोलने में चोट लग गई, यहां जरूर कोई खून की शौकीन चुड़ैल रहती है"!

राम, मैनेजर को आंखें दिखाता है ओर दरवाजा खोलता है और अकस्मात अंदर जाकर, खिड़कियों से बहकर आ रही हवाओं को, अपनी नासिका पुटो में भरकर, गहरी सांस लेता है और आंखें बंद कर, दो बार गोल-गोल घूमता है, उसे ऐसा लगता है, जैसे - उसका वहां कोई है और आज उसी से मिलकर वह झूम उठा है

पर जब अगले ही क्षण उसे स्मरण होता है तो वह पहले की तरह नॉर्मल हो जाता है

राम की यह हरकत देखकर दलाल पूछता है -"कहां खो गए शर्मा जी"?

"कहीं नहीं, मुझे यह पूरा बंगला दिखाओ"? राम ने कहा

फिर दलाल पूरे बंगले का दर्शन कराता है

"मैनेजर साहब, आपको कैसा लगा "बांग्ला नंबर 217"? दलाल ने पूछा

"अरे, इस बंगले के मेरे सर, 30 लाख नहीं, 35 लाख देंगे"! मैनेजर ने कहा

राम ने मैनेजर को फिर आंखें दिखाई और कहा -"शंकर भाई, मुझे यह बंगला पसंद है पर मेरी एक शर्त है, कागजी कार्रवाई मेरे हिसाब से होगी और मैं इस बंगले के 30 लाख नहीं, 25 लाख ही दूंगा, क्योंकि ताला खोलने में किसी के हाथ में चोट नहीं लगती, इसलिए यह बात तो मानना ही पड़ेगी कि यहां किसी आत्मा का साया है, इसलिए मैं पहले, एक हफ्ते यहां पर रहूंगा, अगर मुझे सब कुछ ठीक लगा तो ही यह बंगला खरीदुंगा"! राम ने स्पष्ट कहा

"अरे, शर्मा जी, आप इतने पढ़े लिखे होकर, अंधविश्वास की बातें करते हो, हो,, ,,आ,,,,,,,

दलाल ने एक क्षण के लिए, सामने लगे दर्पण में, किसी खुले बाल वाली, भयानक लड़की को देखा और वह सहम कर चिल्लाया

"क्या हुआ"? राम ने पूछा

"मंजूर है, मंजूर है, आपकी हर शर्त मंजूर है, आज से यह बंगला आपका, अब जल्द से जल्द पेमेंट की व्यवस्था करो, चलो, अब चलते हैं, मुझे अचानक, मेरी नानी याद आ गई"! दलाल ने कमरे से बाहर जाते हुए कहा

दलाल के जाने के बाद मैनेजर कहता है -"अरे वाह सर, मान गए, आपको, आपने एक करोड़ के बंगले का सोदा 25 लाख में कर दिया"!

फिर राम ताले को देखकर आश्चर्य से पूछता है -"इस ताले पर खून लगा था, वह किसने साफ किया"!

"दलाल ने किया होगा"! मैनेजर ने अंदाजे से कहा

राम, ताला लगाकर अपने मैनेजर के साथ बाहर गार्डन में आता है, जहां व्यथित, शंकर दलाल खड़ा है, राम उसे चाबी देता है, तो वह कहता है -"आज से यह चाबी और यह बंगला आपका, आपको एक हफ्ते के अंदर-अंदर इसका पेमेंट करना है"!

"ठीक है, मुझे मंजूर है"! राम ने चाबी जेब में रखते हुए कहा

फिर राम, अपने मैनेजर के साथ घर आता है, घर आते ही राम की पत्नी उसकी आरती उतारती है फिर राम घर के भीतर आता है और अपनी पत्नी से कहता है -"अपनी आंखें बंद करो और हाथ आगे लाओ"!

राम की पत्नी आंखें बंद करती है और अपने हाथ आगे करती है, तब राम उसके हाथ में "बांग्ला नंबर 217" की चाबी रखता है और कहता है -"आज मैंने, अपने सपनों के महल का सौदा कर लिया है, यह सब तुम्हारे, सच्चे प्यार की बदौलत हो पाया है, इसीलिए अपनी आंखें खोलो और अपने सपनों के महल की चाबी देखो"!

जैसे ही राम की पत्नी, आंखें खोलती है और चाबी को देखकर घबरा जाती है और उसे "नहीं चाहिए" कह कर फेंक देती है!

"आखिर क्या रहस्य है, "बंगला नंबर 217 का"?;

"आखिर क्यों "बंग्ला नंबर 217" का मालिक उसे 25 लाख में बेचना चाहता है"?

"दलाल शंकर ने दर्पण में डरावनी आत्मा को देखा था या वह उसका वहम था"?

"राम की पत्नी ने "बंग्ला नंबर 217" की चाबी देखते ही क्यों फेंक दी"?

जानने के लिए पढ़ते रहिए "बंग्ला नंबर 217"

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4 Comments

kashish

24-Sep-2023 12:08 PM

Amazing

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madhura

24-Sep-2023 08:59 AM

Nice

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Anjali korde

24-Sep-2023 08:51 AM

Beautiful start

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